हॉलीवुड की 'Interstellar' फ़िल्म में अवकाशी यानको पहिए के माफिक घूमता दिखाया है। क्या कोई वैज्ञानिक कारणसे यह rotation ज़रूरी है ?

हॉलीवुडकी 'Interstellar' फ़िल्म में अवकाशी यानको पहिए के माफिक घूमता दिखाया है। क्या कोई वैज्ञानिक कारणसे यह rotation ज़रूरी है ?




मानवशरीरका उद्भव एवं उत्क्रांति पृथ्वीके संजोगो अनुसार हुवा है। पृथ्वीके गुरुत्वाकर्षणका प्रभाव उसे लगातार होता रहता है, इसलिए बायोकेमिकल और बायोमीकेनिकल आधार पर पृथ्वी के संजोगोके अनुरूप बना हुवा है। पृथ्वी जैसा गुरुत्वाकर्षणका प्रभाव अंतरिक्षमें नही है, इसलिए वहा रहने वाले यात्रिओ वज़नहीन अवस्थामे रहते है। यह स्थिति अनुरूप नही है, क्योंकि खाने-पीने जैसा साधारण कार्य भी उसके लिए मुश्किल हो जाता है।


इसके अलावा गुरुत्वाकर्षण बलकी गैरमौजूदगीमें अवकाश यात्रिओ की हड्डियोको नुकसान होता है। हड्डियों पर दाब (strees) हो तो ही केल्शियम जमा हो कर सख्त बनी रहती है, जब की वज़नहीन अबस्थामे हड्डियोको ऐसी कसरत नही मिलती। इस कारणसे खुनको ज्ञानतंत्रके लिए केल्शियमकी जरूरत पड़ती है, वैसे हड्डियोमेसे वह कैल्शियम खिंचे, लेकिन हड्डिमे पडरहि यह घटकी आपूर्ति नही हो सकती। हड्डिया जालीदार टूटने जैसी हो जाती है। वज़नहीन अवस्था यात्रिओ के लिए कई समस्या खड़ी कर सकती है।




समस्याके हल के लिए बह्यावकाश यानको पहिएके माफिक, लेकिन धीमी गतिसे घूमता रख कर उसमें कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण पैदा किया जाता है। इसकी विशिष्ठ भौतिकशास्त्रिय फॉर्मूला है। यह उसे नज़रअंदाज़ करते हुए जानने की बात इतनी ही है : समज़लीजिये की यानका व्यास 12 मीटर और वृताकार घूमने का दर 6 रोटेशनका है, तो यानमें 0.48 जितना कृतिम गुरुत्वाकर्षण (artificial gravity) पैदा होता है। पृथ्वीका गुरुत्वाकर्षण बल 1 माना गया है, इसलिए यानमें उसकी तुलनामे 48% गुरुत्वाकर्षण बल का सर्जन होता है ऐसा कह सकते है।


सबसे पहले ब्रिटिश विज्ञानी आर्थर सी.क्लार्कने ऐसी तरकीब खुदके सायन्स फ़िक्शन उपन्यास 2001 : A Space Odesseyमें बेल लिया। निर्माता-दिग्दर्शक स्टेनली कुब्रिकने अद्भुत तरीकेकी फोटोग्राफी आज़माकर कथा को फ़िल्मका स्वरूप दिया। 

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